Header Ads

राष्ट्र चेतना परिषद् ने किया सुप्रीम कोर्ट के कदम का स्वागत



राष्ट्र चेतना परिषद् ने किया सुप्रीम कोर्ट के कदम का स्वागत 
संविधान पीठ को भेजी गई है इंडिया हटाकर भारत करने की याचिका
अमेठी।
राष्ट्र चेतना परिषद् के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाण्डेय ने उच्चतम न्यायालय की ओर से देश का नाम इण्डिया हटाकर भारत करने की याचिका को संविधान पीठ के पास भेजने के कदम का स्वागत किया है। डा. पाण्डेय ने कहा है कि भारत केवल नाम नहीं अपितु भारतीय संस्कृति की पहचान है।
श्री पाण्डेय की ओर से जारी एक बयान में संविधान निर्माताओं के काम पर सवाल उठाया गया है। उन्होंने कहा है कि भारतीय दर्शन के अनुसार मनु की चौथी पीढ़ी के ऋषभदेव के पुत्र भरत के समय देश का नाम भारत कर दिया गया। सुदूर अतीत से चले आ रहे भारत का नाम ब्रिटिश हुकूमत ने जानबूझ कर गलत नीयति से इण्डिया रखा । इंडिया शब्द गुलामी का प्रतीक है। अंग्रेज भारत से 70 साल पहले चले गये अब भी बहुसंख्यक भारतीयों की ओर से इण्डिया शब्द का प्रयोग किया जाना चिंता का विषय है।
डॉ. पाण्डेय का कहना है कि देश में समय-समय पर तत्कालीन शासकों ने नगरों का नाम बदला है। परन्तु देश का नाम भारत ही बना रहा। दुनिया के इतिहास में ऐसा कहीं नहीं मिलता,जहां कि देश की सांस्कृतिक पहचान व उसके नाम में परिवर्तन किया गया हो। धरा के कालखण्ड में देश ने अनेक उतार-चढ़ाव देखा। यहाँ के पुराने विचार, पुरानी मान्यतायें एवं पुरानी संस्कृति बरकरार है। हमें भारतीय होने का गर्व है।

No comments:

Powered by Blogger.