सोशल डिस्टेंस बनाकर किया गया झलकारी बाई के शहादत को नमन
सोशल डिस्टेंस बनाकर किया गया झलकारी बाई के शहादत को नमन
अमेठी।
कोविड-19 महामारी के बचाव को लाकडाउन के कारण रविवार को राजगढ़ में सम्राट अशोक की जयन्ती नहीं मनाई गई। अम्बेडकरवादी संगठनों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना अमर शहीद झलकारी बाई की शौर्य गाथाओं का स्मरण सोशल मीडिया के माध्यम से किया। सोशल डिस्टेंस बनाकर वीरांगना झलकारी बाई के चित्र पर मााल्यर्पण के बाद दीप प्रज्ज्वलित किए गए।
10 मई 1857 को मेरठ छावनी से प्रारम्भ हुआ प्रथम स्वाधीनता संघर्ष 4 जून 1857 कोे झांसी पहुंचा था। स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व रानी लक्ष्मी बाई और उनकी महिला सेना दुर्गादल की सेनापति झलकारी बाई ने कियया था। झलकारी का जन्म झांसी जिले के भोजला ग्राम में सदोवा अहिरवार कोरी परिवार में हुआ था। झलकारी का विवाह पूरन कोरी से हुआ था। पूरन कोरी झांसी की सेेना में गोलंदाज था। झांसी के संग्राम में पूरन कोरी के शहीद होने के बाद भी झलकारी अंग्रेज फि रंगियों से लड़ती रही और युद्ध भूमि में लड़ते हुए 5 अप्रैल 1858 को ग्वालियर के निकट शहीद हुई थी। जिले के कोरी समाज के लोग हर वर्ष झलकारी के जन्म दिन 22 नवम्बर को और शहादत दिवस पर कार्यक्रम करके उनकी शौर्य गाथाओं का वर्णन करते हैं। कोरोना वायरस महामारी से बचाव को लाकडाउन के कारण रविवार को बड़े आयोजन नहीं हुए। लोगों ने अपने घरों में झलकारी के चित्र पर माला,फूल चढ़ाते हुए दीप जलाकर वीरांगना की शौर्य गाथाओं का स्मरण किया।
कमासिन में कैलाशकुमारी धम्म सेवक ने अपने परिवार के लोगों के बीच सोशल डिस्टेंस बनाकर झलकारी बाई की शहादत को नमन किया। राजीव रंजन भारती, ज्योति, किसमता, संगीता, विवेक,रज्जन सिंह चौहान, मोहित सियाराम यादव आदि मौजूद रहे। तिवारीपुर में रामफल फौजी,भगवानपुर में संजय कुमार कोरी ने भी अपने घरों पर झलकारी बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कटरा रानी में शिक्षक हरिप्रसाद गौतम ने अपने घर के पास स्थित वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
अमेठी।
कोविड-19 महामारी के बचाव को लाकडाउन के कारण रविवार को राजगढ़ में सम्राट अशोक की जयन्ती नहीं मनाई गई। अम्बेडकरवादी संगठनों ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना अमर शहीद झलकारी बाई की शौर्य गाथाओं का स्मरण सोशल मीडिया के माध्यम से किया। सोशल डिस्टेंस बनाकर वीरांगना झलकारी बाई के चित्र पर मााल्यर्पण के बाद दीप प्रज्ज्वलित किए गए।
10 मई 1857 को मेरठ छावनी से प्रारम्भ हुआ प्रथम स्वाधीनता संघर्ष 4 जून 1857 कोे झांसी पहुंचा था। स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व रानी लक्ष्मी बाई और उनकी महिला सेना दुर्गादल की सेनापति झलकारी बाई ने कियया था। झलकारी का जन्म झांसी जिले के भोजला ग्राम में सदोवा अहिरवार कोरी परिवार में हुआ था। झलकारी का विवाह पूरन कोरी से हुआ था। पूरन कोरी झांसी की सेेना में गोलंदाज था। झांसी के संग्राम में पूरन कोरी के शहीद होने के बाद भी झलकारी अंग्रेज फि रंगियों से लड़ती रही और युद्ध भूमि में लड़ते हुए 5 अप्रैल 1858 को ग्वालियर के निकट शहीद हुई थी। जिले के कोरी समाज के लोग हर वर्ष झलकारी के जन्म दिन 22 नवम्बर को और शहादत दिवस पर कार्यक्रम करके उनकी शौर्य गाथाओं का वर्णन करते हैं। कोरोना वायरस महामारी से बचाव को लाकडाउन के कारण रविवार को बड़े आयोजन नहीं हुए। लोगों ने अपने घरों में झलकारी के चित्र पर माला,फूल चढ़ाते हुए दीप जलाकर वीरांगना की शौर्य गाथाओं का स्मरण किया।
कमासिन में कैलाशकुमारी धम्म सेवक ने अपने परिवार के लोगों के बीच सोशल डिस्टेंस बनाकर झलकारी बाई की शहादत को नमन किया। राजीव रंजन भारती, ज्योति, किसमता, संगीता, विवेक,रज्जन सिंह चौहान, मोहित सियाराम यादव आदि मौजूद रहे। तिवारीपुर में रामफल फौजी,भगवानपुर में संजय कुमार कोरी ने भी अपने घरों पर झलकारी बाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कटरा रानी में शिक्षक हरिप्रसाद गौतम ने अपने घर के पास स्थित वीरांगना झलकारी बाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

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