किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द अपनाये उसे इंसान कहते हैं- विद्याधर त्रिपाठी
किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द अपनाये उसे इंसान कहते हैं- विद्याधर त्रिपाठी
मुंशीगंज।
बन्दोइया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी ने कहा कि किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द अपनाये उसे इंसान कहते हैं। जीवन के मुश्किल समय में भी जो अपने पथ से विचलित न हो धर्मानुसारण करते हुए सत्य का अनुगामी बना रहे और साथ ही जो दूसरे को भी विपरीत परिस्थितियों से निकालकर उसे अनूकूल परिस्थितियों में लाकर खड़ा कर दे वही सच्चा कर्तव्यनष्ठि मनुष्य है, यही सच्चा मनुष्यत्व है।
गुरुवार को कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी ने कहा कि आज मनुष्य के पास अनेकों भौतिक साधन तो हैं लेकिन साधना नही है।ईश्वर की पूजा के साथ व्यक्ति को मानव सेवा भी करनी चाहिए। राजा परीक्षित की कथा को बताते हुए व्यास ने कहा कि पंचभौतिक शरीर धारी की जब मृत्यु हो जाती है तो उसकी शुद्धि हेतु जीवात्मा यमलोक जाती है जहाँ उसके कर्मों के अनुसार उसे तमाम यातनाएं दी जाती हैं, और 84 लाख योनियों में भृमण करते हुए जीवात्मा मनुष्य रूप में आती है। यमलोक की यातनाओं को सुनते हुए राजा परीक्षित ने इसकी मुक्ति और यातनाओं से बचने का उपाय पूछा तो भगवान ने उन्हें सन्ध्यावन्दन और मानवसेवा का मार्ग बताया। मानव जीवन धर्म के मार्ग पर चलने और सेवा के लिए होती है,कभी भी अभिमान नही करना चाहिए और मन को वश में रखकर ही जीवन मे नित नए आयामो की ओर चलना चाहिए।
कथा यजमान लक्ष्मी कांत मिश्र व निर्मला मिश्र ने आये हुए श्रोता श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।आयोजक मण्डल में हरिओम मिश्र,मनोज मिश्र,अनंत मिश्र ने बताया कि आगामी 27 मई को हवन पूजन के उपरांत 28 मई को विशाल भण्डारे का आयोजन सुनिश्चित हुआ है। कथा में क्षेत्र के डॉ विजय कुमार मिश्र,गया प्रसाद तिवारी, राम उजागिर शुक्ल,भोला नाथ शुक्ल,प्रदीप,माता प्रसाद मिश्र,रमाकांत मिश्र, राम बाबू,अजय तिवारी, विनोद ,हरि कृष्ण मिश्र आदि मौजूद रहे।
मुंशीगंज।
बन्दोइया में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी ने कहा कि किसी के काम जो आये उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द अपनाये उसे इंसान कहते हैं। जीवन के मुश्किल समय में भी जो अपने पथ से विचलित न हो धर्मानुसारण करते हुए सत्य का अनुगामी बना रहे और साथ ही जो दूसरे को भी विपरीत परिस्थितियों से निकालकर उसे अनूकूल परिस्थितियों में लाकर खड़ा कर दे वही सच्चा कर्तव्यनष्ठि मनुष्य है, यही सच्चा मनुष्यत्व है।गुरुवार को कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी ने कहा कि आज मनुष्य के पास अनेकों भौतिक साधन तो हैं लेकिन साधना नही है।ईश्वर की पूजा के साथ व्यक्ति को मानव सेवा भी करनी चाहिए। राजा परीक्षित की कथा को बताते हुए व्यास ने कहा कि पंचभौतिक शरीर धारी की जब मृत्यु हो जाती है तो उसकी शुद्धि हेतु जीवात्मा यमलोक जाती है जहाँ उसके कर्मों के अनुसार उसे तमाम यातनाएं दी जाती हैं, और 84 लाख योनियों में भृमण करते हुए जीवात्मा मनुष्य रूप में आती है। यमलोक की यातनाओं को सुनते हुए राजा परीक्षित ने इसकी मुक्ति और यातनाओं से बचने का उपाय पूछा तो भगवान ने उन्हें सन्ध्यावन्दन और मानवसेवा का मार्ग बताया। मानव जीवन धर्म के मार्ग पर चलने और सेवा के लिए होती है,कभी भी अभिमान नही करना चाहिए और मन को वश में रखकर ही जीवन मे नित नए आयामो की ओर चलना चाहिए।
कथा यजमान लक्ष्मी कांत मिश्र व निर्मला मिश्र ने आये हुए श्रोता श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।आयोजक मण्डल में हरिओम मिश्र,मनोज मिश्र,अनंत मिश्र ने बताया कि आगामी 27 मई को हवन पूजन के उपरांत 28 मई को विशाल भण्डारे का आयोजन सुनिश्चित हुआ है। कथा में क्षेत्र के डॉ विजय कुमार मिश्र,गया प्रसाद तिवारी, राम उजागिर शुक्ल,भोला नाथ शुक्ल,प्रदीप,माता प्रसाद मिश्र,रमाकांत मिश्र, राम बाबू,अजय तिवारी, विनोद ,हरि कृष्ण मिश्र आदि मौजूद रहे।
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