फैकल्टी डेवेलपमेंट कार्यक्रम में हुआ राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संवाद
फैकल्टी डेवेलपमेंट कार्यक्रम में हुआ राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संवाद रणवीर रणंजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सात दिवसीय फैकल्टी डेवेलपमेंट कार्यक्रम का आयोजन जारी है। रविवार को तीसरे दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति व महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा की संकल्पना पर विस्तार से संवाद हुआ।
तीसरे दिन के सत्र का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन एवं गाँधीजी के भजन एवं प्रार्थना के साथ हुआ। प्रथम सत्र को सम्बोधित करते हुए महात्मा गाँधी राष्ट्रीय शिक्षा परिषद् के राज्य समन्वयक डॉ0 अनिल कुमार दूबे ने कहा सरकार शिक्षक को कर्मचारी नही मानती। शिक्षक को जबावदेही, जिम्मेदारी एवं ईमानदारी को अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए। गाँधीजी ने नई तालीम में संधारणीय विकास को आधार बनाया। वे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को आवश्यक मानते थे।
कार्यक्र म संयोजक डॉ0 त्रिवेणी सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 में स्कूलों को समाज से जोड़ने की बात की गयी है। यह तभी सम्भव है जब लोग अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। गाँधीजी सदैव प्रयोगधर्मी थे। उन्होंने अन्तिम व्यक्ति के विकास को अपने विचारों का केन्द्र बनाया था। डॉ0 सुभाष सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शत प्रतिशत नामांकन को प्रभावी प्रावधान है परन्तु इसको किस तरह लागू किया जाय यह स्पष्ट नही है। शिक्षक विद्यार्थी का अनुपात कक्षा को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ0 प्रमिला ने की। डॉ0 सन्तोष कुमार सिंह ने कार्यशाला की विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया। कार्यक्रम में डॉ0 धनंजय सिंह, डॉ0 दुष्यन्त प्रताप सिंह, डॉ0 भगवती थिटे, डॉ0 ज्योति सिंह, डॉ0 विनोद यादव, डॉ0 तिरूपति तिवारी, डॉ0 एम.पी. त्रिपाठी, डॉ0 धमेन्द्र कुमार वैश्य आदि प्रतिभागी उपस्थित थे।
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