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भारत मे स्त्री शिक्षा की जनक प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले की मनाई गई जयंती



भारत मे स्त्री शिक्षा की जनक प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले की मनाई गई जयंती






 अमेठी।

भारत मे स्त्री शिक्षा की जनक प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले की जयंती पर  डा अम्बेडकर मिशन से जुड़े लोगों और बसपा समर्थकों ने  फूले दम्पति  की सामाजिक क्रांति और    राष्ट्र सेवाओं का स्मरण किया और श्रद्धा सुमन अर्पित किए। सरायखेमा मे मौर्य समाज के लोगों ने कार्यक्रम आयोजित किया।

  सावित्री बाई फुले की जयंती पर सोशल मीडिया पर रविवार से ही कार्यक्रमों के आयोजन के संदेश शेयर किए जा रहे हैं। 192वीं जयंती पर  विचार गोष्ठियों और संवाद सभाओं का आयोजन किया गया। तिवारी पुर मे रामफल फौजी ने सावित्रीबाई के चित्र पर माल्यार्पण किया।उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले एक महान समाजसुधारक   थी।गुलाम भारत मे उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर शिक्षा की ज्योति जलाई।कमासिन मे किसमता भारती के संयोजन मे आयोजित कार्यक्रम मे महिलाओं ने महात्मा ज्योतिबा राव और सावित्रीबाई फुले का गुणगान किया। ज्योति  प्रियदर्शन ने कहा कि  समाज की ओर से ह्रदय विदारक अपमान,कीचड़ गोबर और पत्थर की मार सहकर भी  सावित्रीबाई ने महिलाओं को  पढाने का काम बंद नहीं किया और   महाराष्ट्र मे  अपने पति के सहयोग से महिलाओं के लिए 18स्कूल खोले। कैलाश कुमारी,संगीता भारती, प्रतिज्ञा, यशोदा, पूजा, मोहित कुमार, संतराम, रितिक, प्रेरणा, अंशिका, दर्शिका ,रीता, कोयला आदि मौजूद रहे।

इनसेट

नारी मुक्ति आन्दोलन की प्रणेता  हैं सावित्री बाई फुले-रामसजीवन मौर्य

मुंशीगंज। सरायखेमा मे सावित्रीबाई फुले की जयंती पर मौर्य समाज के लोगों ने संवाद  सभा का आयोजन किया। कार्यक्रम मे बडी संख्या मे महिलाएं भी शामिल हुईं।  मुख्य अतिथि रामसजीवन मौर्य ने फूले दम्पति के जीवन दर्शन की जानकारी दी।उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले ने गुलाम भारत मे कठिन संघर्ष करके महिलाओं और अपवंचितों के लिये शिक्षा के द्वार खोले।वे नारी मुक्ति आन्दोलन की प्रणेता हैं।

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