सडिला में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी
सडिला में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी
अनादि काल से भगवान में श्रद्धा और विश्वास करने वालो का नहीं हुआ बाल -बांका : पण्डित मनीष चन्द्र त्रिपाठी

अमेठी।
सडि़ला में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। कथा व्यास आचार्य पण्डित मनीष चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए अपने जीवन रूपी गाड़ी में भगवान का स्थान ऊँचा रखते हुए अपने जीवन को नित नई ऊंचाइयों की ओर ले जाना चाहिए। ईश्वर का स्मरण करने मात्र से ही जीवन के समस्त दुखों का नाश हो जाता है।
कथा को वर्तमान समय से चरितार्थ व प्रासंगिक बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि अनादि काल से भगवान में श्रद्धा और वश्विास करने वालो का बाल भी बांका नही हुआ है, इसलिये हम सब भले ही गृहस्थ आश्रम में हैं लेकिन ईश्वरीय सत्ता में अपने तन ,मन,धन से लगकर समस्त कार्यों का नर्विहन करना चाहिए। कथा में पूतना उद्धार की कथा को सुनाते हुए व्यास ने कहा कि राक्षस कुल में जन्म लेकर और बालकों को मारकर भी भगवान ने उसकी मातृ वत्सलता के चलते उसका उद्धार कर दिया। व्यास ने तृणा वर्त उद्धार का भी रोचक वर्णन किया।
संगीतमयी कथा में भजन गायक मण्डल के सूरज मश्रि, पिंटू तिवारी, विनोद तिवारी ने लोगों का मन मोह लिया। कथा यजमान बजरंग बहादुर शर्मा, अमरावती शर्मा ने आये हुए श्रद्धालुओं का अभिवादन किया।।
इस अवसर पर राम सजीवन शर्मा,विजय बहादुर शर्मा, राज बहादुर शर्मा, समाजसेवी जितेंद्र शर्मा,नरेंद्र शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, वीरेन्द्र शर्मा,सुरेंद्र शर्मा, विनय शर्मा, विवेक व शिवांशु शर्मा ,मधुर मश्रि,मथुरा प्रसाद,जगदीश सिंह,सुरेंद्र तिवारी, दयाराम तिवारी, शौर्य वीर तिवारी, अवधेश चन्द्र यादव,रत्नाकर तिवारी आदि मौजूद रहे।
अनादि काल से भगवान में श्रद्धा और विश्वास करने वालो का नहीं हुआ बाल -बांका : पण्डित मनीष चन्द्र त्रिपाठी

अमेठी।
सडि़ला में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन जारी है। कथा व्यास आचार्य पण्डित मनीष चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए अपने जीवन रूपी गाड़ी में भगवान का स्थान ऊँचा रखते हुए अपने जीवन को नित नई ऊंचाइयों की ओर ले जाना चाहिए। ईश्वर का स्मरण करने मात्र से ही जीवन के समस्त दुखों का नाश हो जाता है।
कथा को वर्तमान समय से चरितार्थ व प्रासंगिक बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि अनादि काल से भगवान में श्रद्धा और वश्विास करने वालो का बाल भी बांका नही हुआ है, इसलिये हम सब भले ही गृहस्थ आश्रम में हैं लेकिन ईश्वरीय सत्ता में अपने तन ,मन,धन से लगकर समस्त कार्यों का नर्विहन करना चाहिए। कथा में पूतना उद्धार की कथा को सुनाते हुए व्यास ने कहा कि राक्षस कुल में जन्म लेकर और बालकों को मारकर भी भगवान ने उसकी मातृ वत्सलता के चलते उसका उद्धार कर दिया। व्यास ने तृणा वर्त उद्धार का भी रोचक वर्णन किया।
संगीतमयी कथा में भजन गायक मण्डल के सूरज मश्रि, पिंटू तिवारी, विनोद तिवारी ने लोगों का मन मोह लिया। कथा यजमान बजरंग बहादुर शर्मा, अमरावती शर्मा ने आये हुए श्रद्धालुओं का अभिवादन किया।।
इस अवसर पर राम सजीवन शर्मा,विजय बहादुर शर्मा, राज बहादुर शर्मा, समाजसेवी जितेंद्र शर्मा,नरेंद्र शर्मा, देवेन्द्र शर्मा, वीरेन्द्र शर्मा,सुरेंद्र शर्मा, विनय शर्मा, विवेक व शिवांशु शर्मा ,मधुर मश्रि,मथुरा प्रसाद,जगदीश सिंह,सुरेंद्र तिवारी, दयाराम तिवारी, शौर्य वीर तिवारी, अवधेश चन्द्र यादव,रत्नाकर तिवारी आदि मौजूद रहे।
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