अमेठी में मनाई गई बुढ़ऊ महाराज की जयन्ती
अमेठी में मनाई गई बुढ़ऊ महाराज की जयन्ती
अमेठी।
अमेठी के मालवीय राजर्षि रणांजय सिंह की 118वीं जयन्ती पर माल्यार्पण एवं हवन पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। अनन्त विक्रम सिंह के साथ बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं ने ददन-सदन तिराहे पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। आरआरपीजी कालेज में हवन पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सोमवार को राजर्षि रणांजय सिंह की 118वीं जयन्ती मनाई गई । राजर्षि रणांजय सिंह का जन्म अमेठी राज परिवार में 29 अप्रैल 1901 को हुआ था। उन्होंने आजीवन राष्ट्र सेवा का व्रत निभाया। वे आर्य समाज के प्रखर अनुयायी थे। शिक्षा प्रसार ,धर्म प्रचार और समाज सुधार उनके जीवन का मूलमंत्र था। राजर्षि रणांजय सिंह ने अमेठी में कई शिक्षण संस्थाओं की स्थापना में योगदान किया। आरआरपीजी कालेज के प्रोफेसर डा धनंजय सिंह ने बताया कि राजर्षि रणांजय सिंह अमेठी में ‘बुढऊ महाराज’ के नाम से लोकप्रिय थे। उन्होंने अमेठी को लहुरी काशी के रूप में विकसित करने का सपना संजोया था। डा सुभाष सिंह ने कहा कि राज्य सभा सदस्य डा संजय सिंह और डा अमिता सिंह ने अमेठी में कई शिक्षण संस्थान स्थापित कर राजर्षि के सपनों को साकार किया है।
अमेठी।
अमेठी के मालवीय राजर्षि रणांजय सिंह की 118वीं जयन्ती पर माल्यार्पण एवं हवन पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। अनन्त विक्रम सिंह के साथ बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं ने ददन-सदन तिराहे पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। आरआरपीजी कालेज में हवन पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सोमवार को राजर्षि रणांजय सिंह की 118वीं जयन्ती मनाई गई । राजर्षि रणांजय सिंह का जन्म अमेठी राज परिवार में 29 अप्रैल 1901 को हुआ था। उन्होंने आजीवन राष्ट्र सेवा का व्रत निभाया। वे आर्य समाज के प्रखर अनुयायी थे। शिक्षा प्रसार ,धर्म प्रचार और समाज सुधार उनके जीवन का मूलमंत्र था। राजर्षि रणांजय सिंह ने अमेठी में कई शिक्षण संस्थाओं की स्थापना में योगदान किया। आरआरपीजी कालेज के प्रोफेसर डा धनंजय सिंह ने बताया कि राजर्षि रणांजय सिंह अमेठी में ‘बुढऊ महाराज’ के नाम से लोकप्रिय थे। उन्होंने अमेठी को लहुरी काशी के रूप में विकसित करने का सपना संजोया था। डा सुभाष सिंह ने कहा कि राज्य सभा सदस्य डा संजय सिंह और डा अमिता सिंह ने अमेठी में कई शिक्षण संस्थान स्थापित कर राजर्षि के सपनों को साकार किया है।

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