दिल की कोठरिया साफ नहीं ,ऊपर के नहाए का होई
दिल की कोठरिया साफ नहीं ,ऊपर के नहाए का होई
अमेठी।
कस्बे में मुसाफिरखाना मार्ग पर स्थित कबीर आश्रम पिछले पचास साल से संत शिरोमणि का संदेश बांट रहा है। आश्रम के शिष्य जिले के 86 गांवों में है। सत्तर व अस्सी के दशक में आश्रम ने कबीर महासभा के आन्दोलन को आगे बढ़ाकर दलित समाज की सामाजिक बुराईयों को दूर करने में उल्लेखनीय योगदान किया था।
सन्त रामदास इस जिले में 1950 में आए। 10 साल के भीतर जिले में उनके कई शिष्य हो गए। 1960 में उनके शिष्य बने कानपुर के संत मलंग साहब 93 वर्ष की लम्बी आयु में आज भी संत शिरोमणि की वाणी के सहारे दलित एवं पिछड़े वर्ग के लोगों को गृहस्थ जीवन में अच्छा काम करते हुए शिक्षा-दीक्षा एवं भक्ति मार्ग पर चलने को प्रेरित कर रहे हैं।
सन्त रामदास की शिष्या साध्वी चेतनदास ने वर्ष 1970 में इस आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यहां जंगल था। आश्रम की ओर से अभी तक कबीर जयन्ती के अवसर पर 47 भण्डारे आयोजित किए जा चुके हैं।
अस्सी के दशक तक आश्रम पर रोज सत्संग होता था। सन्त कबीर की वाणी और उनके भजन सुनने को कुड़वा, डालव, धरईमाफी, कटरारानी, शारदन, बघौरा, थौरा आदि गांवों के लोग रोज आते थे। तत्कालीन दस्यु सरगना बरसाती भी इस आश्रम में श्रद्धालुओं में शामिल रहे हैं। साध्वी चेतन दास के शिष्य सन्त मलंग दास साहब ने बताया कि यहां एक -एक रात में बयालीस-बयालीस लोगों को दीक्षा दे चुके हैं। लगभग बीस साल तक दलित और पिछड़े समाज के लोगों ने भक्ति मार्ग अपनाने और नशा और मांस मदिरा के सेवन से दूर रहने का आन्दोलन तेजी से चला है। आश्रम के शिष्य उत्तर प्रदेश के बाहर पंजाब ,चण्डीगढ़ ,मध्य प्रदेश ,उत्तराखण्ड ,लुधियाना,मुम्बई आदि शहरों में बसे हुए हैं।
सन्त मलंग दास ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा जी के समय संसद भवन के पास सत्संग और भजन के आयोजन में सन्त रामदास के साथ मुझे भी भजन गाने का अवसर मिल चुका है।
सन्त मलंग दास साहब ने कहा कि कबीर के भक्ति मार्ग ने दलित समाज को गुलामी से मुक्ति दिलाने में सबसे बड़ा योगदान किया है। आशाराम बापू और रामरहीम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विषय भोग न छोड़ने वाले सन्त नहीं हो सकते, कबीर खड़े बाजार में लिए लकूटा हाथ, जो घर फूं को आपने चले हमारे साथ--------- का उल्लेख किया और कहा कि सतगुरु का घर फूंकने का तात्पर्य काम,क्रोध, मोह, ईष्या,द्वेष व अहंकार को दूूर करना है। सांच बराबर तप नहीं,झूठ बराबर पाप,जाके हृदय सांच है ताके हृदय आप।
अमेठी।
कस्बे में मुसाफिरखाना मार्ग पर स्थित कबीर आश्रम पिछले पचास साल से संत शिरोमणि का संदेश बांट रहा है। आश्रम के शिष्य जिले के 86 गांवों में है। सत्तर व अस्सी के दशक में आश्रम ने कबीर महासभा के आन्दोलन को आगे बढ़ाकर दलित समाज की सामाजिक बुराईयों को दूर करने में उल्लेखनीय योगदान किया था।
सन्त रामदास इस जिले में 1950 में आए। 10 साल के भीतर जिले में उनके कई शिष्य हो गए। 1960 में उनके शिष्य बने कानपुर के संत मलंग साहब 93 वर्ष की लम्बी आयु में आज भी संत शिरोमणि की वाणी के सहारे दलित एवं पिछड़े वर्ग के लोगों को गृहस्थ जीवन में अच्छा काम करते हुए शिक्षा-दीक्षा एवं भक्ति मार्ग पर चलने को प्रेरित कर रहे हैं।
सन्त रामदास की शिष्या साध्वी चेतनदास ने वर्ष 1970 में इस आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यहां जंगल था। आश्रम की ओर से अभी तक कबीर जयन्ती के अवसर पर 47 भण्डारे आयोजित किए जा चुके हैं।
अस्सी के दशक तक आश्रम पर रोज सत्संग होता था। सन्त कबीर की वाणी और उनके भजन सुनने को कुड़वा, डालव, धरईमाफी, कटरारानी, शारदन, बघौरा, थौरा आदि गांवों के लोग रोज आते थे। तत्कालीन दस्यु सरगना बरसाती भी इस आश्रम में श्रद्धालुओं में शामिल रहे हैं। साध्वी चेतन दास के शिष्य सन्त मलंग दास साहब ने बताया कि यहां एक -एक रात में बयालीस-बयालीस लोगों को दीक्षा दे चुके हैं। लगभग बीस साल तक दलित और पिछड़े समाज के लोगों ने भक्ति मार्ग अपनाने और नशा और मांस मदिरा के सेवन से दूर रहने का आन्दोलन तेजी से चला है। आश्रम के शिष्य उत्तर प्रदेश के बाहर पंजाब ,चण्डीगढ़ ,मध्य प्रदेश ,उत्तराखण्ड ,लुधियाना,मुम्बई आदि शहरों में बसे हुए हैं।
सन्त मलंग दास ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा जी के समय संसद भवन के पास सत्संग और भजन के आयोजन में सन्त रामदास के साथ मुझे भी भजन गाने का अवसर मिल चुका है।
सन्त मलंग दास साहब ने कहा कि कबीर के भक्ति मार्ग ने दलित समाज को गुलामी से मुक्ति दिलाने में सबसे बड़ा योगदान किया है। आशाराम बापू और रामरहीम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विषय भोग न छोड़ने वाले सन्त नहीं हो सकते, कबीर खड़े बाजार में लिए लकूटा हाथ, जो घर फूं को आपने चले हमारे साथ--------- का उल्लेख किया और कहा कि सतगुरु का घर फूंकने का तात्पर्य काम,क्रोध, मोह, ईष्या,द्वेष व अहंकार को दूूर करना है। सांच बराबर तप नहीं,झूठ बराबर पाप,जाके हृदय सांच है ताके हृदय आप।

No comments: