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स्कूली शिक्षा और साक्षरता का जनघोषणा पत्र जारी करने की तैयारी


स्कूली शिक्षा और साक्षरता का जनघोषणा पत्र जारी करने की तैयारी 

धीमी गति से लागू हुए आरटीई के प्राविधान,दसवीं के बाद ड्राप आउट हो रहे 47 फीसदी विद्यार्थी
शिक्षा पर खर्च होना चाहिए सकल घरेलू उत्पाद की 6 फीसदी धनराशि
 अमेठी।
अखिल भारतीय जनविज्ञान नेटवर्क और भारत ज्ञान विज्ञान समिति ने स्कूली शिक्षा और साक्षरता के प्रति देश के राजनैतिक दलों की जबाबदेही तय करने को ‘सबका देश -हमारा देश अभियान’ शुरू किया है। सबको शिक्षा-सबको सुरक्षा जनसंवाद अभियान की पहली बैठक रविवार को हुई। बैठक में सभी जनसंगठनों और शिक्षक संगठनों को साथ लेकर स्कूली शिक्षा और साक्षरता का जनघोषणा तैयार करने पर जोर दिया गया। जनघोषणा पत्र 2 अप्रैल को जारी किया जायेगा।
बैठक में राज्य समन्वयक आर के मिश्र ने भारत में शिक्षा की वर्तमान तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पिछले दस साल के भीतर सरकार का ज्यादा जोर गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को मान्यता प्रदान करके शिक्षा का निजीकरण कर रहा है। आईटीई के प्राविधान धीमी गति से लागू किए गए। भारत में दसवीं कक्षा तक पहुंचते पहुंचते स्कूल छोड़ने वालों की संख्या 47 प्रतिशत है। 30 करोड़ लोग अभी भी अशिक्षित हैं। जनता में वैज्ञानित दृष्टिकोण का विकास सरकार और राजसत्ता की जिम्मेदारी है। मीरा गुप्ता ने कहा कि जीडीपी का 6 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होना चाहिए। भारत सरकार ने अभी तक जीडीपी का 2.7प्रतिशत ही शिक्षा पर खर्च किया है। सेवानिवृत्त शिक्षक जगन्नाथ मिश्र ने कहा कि सरकारी स्कूलों के नामांकन बढ़ाने की सरकार की मंशा तक तक फेल रहेगी, जब तक गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन बन्द नहीं होगा।
संवाद कार्यक्रम का संचालन इन्द्रपाल ने किया। शकुन्तला गुप्ता,संजीव ,दिनेश कुमार, राजेश कुमार, त्रिभुवन दत्त ,ललित आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। 

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