दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन
अमेठी।
सोमवार को रणवीर रणंजय स्नातकोत्तर कालेज में शिक्षक प्रशिक्षण विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित शक्षिण एवं अभिगम के नवीन उपागम विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वन्दना से हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद के प्रोफेसर एस0पी0 गुप्ता ने कहा कि आज हमें शिक्षण के परम्परागति पद्धति में बदलाव करना होगा। प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि हम अपने शक्षिण पद्धति द्वारा प्रन्टि टेक्नोलाजी के माध्यम से जो मैटर छात्रों को देते हैं उसमें आसानी से परिवर्तन नहीं किया जा सकता। हमें अपने शक्षिण में मल्टीमीडिया का प्रयोग अधिक करना चाहिए। मल्टीमीडिया की सहायता से हम अपने शक्षिण को अधिक रूचिकर एवं गुणात्मक बना सकते हैं। प्रोफेसर नीरज शुक्ल ने समावेशी शक्षिा पर विशेष बल दिया और कहा कि शक्षिकों को अपने नैतिक मूल्य बनाये रखना चाहिए। आभार व्यक्त करते हुए प्राचार्य डॉ0 त्रिवेणी सिंह ने कहा कि दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी द्वारा प्रतिभागियों को नवीन शक्षिण पद्धति को जानने एवं समझने का अवसर प्राप्त हुआ। स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ0 लाजो पाण्डेय ने किया। आयोजन सचिव डॉ0 एम0पी0 त्रिपाठी ने संगोष्ठी में शोध कर्ताओं द्वारा पढे़ गये शोध पत्रों के शोध नष्किर्षों की संक्षप्ति आख्या प्रस्तुत की। संगोष्ठी में डॉ0 पी0के0 चौरसिया, डॉ0 धनंजय सिंह, डॉ0 राधेश्याम प्रसाद, डॉ0 सुभाष सिंह, डॉ0 सुधीर सिंह, डॉ0 सन्तोष कुमार सिंह, डॉ0 दुष्यन्त प्रताप सिंह, डॉ0 चन्द्रशेखर सिंह, डॉ0 विनोद कुमार मश्रि, डॉ0 निधि सिंह, डॉ0 आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ0 अजय कुमार सिंह, डॉ0 धर्मेन्द्र कुमार वैश्य आदि लोग उपस्थित थे। संगोष्ठी का संचालन छात्रा आस्था मश्रिा ने किया। समापन सत्र से पहले प्रोफेसर के0पी0 पाण्डेय, प्रोफेसर एस0पी0 गुप्ता, प्रोफेसर नीरज शुक्ल, डॉ0 एन0के0 सिंह, डॉ0 त्रिवेणी सिंह, डॉ0 प्रमिला ने पैनल डस्किशन में अपना विचार रखा।
अमेठी।
सोमवार को रणवीर रणंजय स्नातकोत्तर कालेज में शिक्षक प्रशिक्षण विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित शक्षिण एवं अभिगम के नवीन उपागम विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वन्दना से हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद के प्रोफेसर एस0पी0 गुप्ता ने कहा कि आज हमें शिक्षण के परम्परागति पद्धति में बदलाव करना होगा। प्रोफेसर गुप्ता ने कहा कि हम अपने शक्षिण पद्धति द्वारा प्रन्टि टेक्नोलाजी के माध्यम से जो मैटर छात्रों को देते हैं उसमें आसानी से परिवर्तन नहीं किया जा सकता। हमें अपने शक्षिण में मल्टीमीडिया का प्रयोग अधिक करना चाहिए। मल्टीमीडिया की सहायता से हम अपने शक्षिण को अधिक रूचिकर एवं गुणात्मक बना सकते हैं। प्रोफेसर नीरज शुक्ल ने समावेशी शक्षिा पर विशेष बल दिया और कहा कि शक्षिकों को अपने नैतिक मूल्य बनाये रखना चाहिए। आभार व्यक्त करते हुए प्राचार्य डॉ0 त्रिवेणी सिंह ने कहा कि दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी द्वारा प्रतिभागियों को नवीन शक्षिण पद्धति को जानने एवं समझने का अवसर प्राप्त हुआ। स्वागत विभागाध्यक्ष डॉ0 लाजो पाण्डेय ने किया। आयोजन सचिव डॉ0 एम0पी0 त्रिपाठी ने संगोष्ठी में शोध कर्ताओं द्वारा पढे़ गये शोध पत्रों के शोध नष्किर्षों की संक्षप्ति आख्या प्रस्तुत की। संगोष्ठी में डॉ0 पी0के0 चौरसिया, डॉ0 धनंजय सिंह, डॉ0 राधेश्याम प्रसाद, डॉ0 सुभाष सिंह, डॉ0 सुधीर सिंह, डॉ0 सन्तोष कुमार सिंह, डॉ0 दुष्यन्त प्रताप सिंह, डॉ0 चन्द्रशेखर सिंह, डॉ0 विनोद कुमार मश्रि, डॉ0 निधि सिंह, डॉ0 आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ0 अजय कुमार सिंह, डॉ0 धर्मेन्द्र कुमार वैश्य आदि लोग उपस्थित थे। संगोष्ठी का संचालन छात्रा आस्था मश्रिा ने किया। समापन सत्र से पहले प्रोफेसर के0पी0 पाण्डेय, प्रोफेसर एस0पी0 गुप्ता, प्रोफेसर नीरज शुक्ल, डॉ0 एन0के0 सिंह, डॉ0 त्रिवेणी सिंह, डॉ0 प्रमिला ने पैनल डस्किशन में अपना विचार रखा।
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