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विचार गोष्ठी में हुआ बौद्ध धर्म की शिक्षाओं पर संवाद


विचार गोष्ठी में हुआ बौद्ध धर्म की शिक्षाओं पर संवाद

नये भारत के निर्माण को अच्छी शिक्षा पहली जरूरत : भन्ते प्रज्ञानाम
अमेठी।
बुधवार को इस्माइलपुर में निर्वाण प्राप्त श्रद्धेय रामलाल की प्रथम पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि सभा धम्म देशना कार्यक्रम और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान आयोजक की ओर से पचास विधवाओं को शाल प्रदान किए गए। एक दर्जन सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। बौद्ध भिक्षु भन्ते प्रज्ञा नाम ने धम्मोपदेश दिए।
निर्वाण प्राप्त रामलाल अम्बेडकर कल्याण समिति के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर बुधवार की शाम समिति के कार्यकर्ताओं ने श्रद्धाजंलिसभा व विचार गोष्ठी का एक साथ आयोजन किया। त्रिसरण पंचशील के बाद भन्ते प्रज्ञानाम ने बौद्ध धर्म व बाबा साहब की शिक्षाओं पर संवाद किया। 
उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म वैज्ञानिक धर्म है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दीक्षा देकर ही बाबा साहब के सपनो के नये भारत बन सकता है। भारतीय संविधान ही सबसे बड़ा धर्म ग्रंथ है। संविधान की सुरक्षा और संवैधानिक व्यवस्थाओं को ठीक ढंग से लागू कराना बाबा साहब के अनुनायियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
अवकाश प्राप्त शिक्षक सीताराम और राम फल ने भारतीय संविधान की चुनौतियों और बौद्ध धर्म के स्वतंत्र कानून की मांग को लेकर आल इंडिया एक्सन कमेटी फार द बुद्धस्टि परशनल ला की ओर से चलाए जा रहे आन्दोलन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन धर्मेन्द्र कुमार ने किया। शिक्षक इन्द्रपाल गौतम,सरोज गौतम,राजेन्द्र व अनिल ने अपने परिवार के साथ लोगों का स्वागत किया। विधवा महिलाओं को शाल प्रदान किया।
विचार गोष्ठी को संजय कुमार कोरी ,रीता यादव राम अभिलाष बौद्ध, राम फल फौजी, राम सुमिरन चक्रवर्ती, प्रहलाद गौतम ,बहाऊ राम चौधरी, राजेश कुमार आदि ने संबोधित किया। अविनाश पाल, भोलाराम, राजीव रंजन, संजय कुमार राव, मनोज कुमार बौद्ध, बृजेश कुमार, राम बली गौतम ,राजकुमार ,प्रमोद कुमार, अनिल ,राजेन्द्र कुमार, सावित्री देवी, जयदेव बौद्ध, नबाब अली, सियाराम यादव आदि मौजूद रहे।




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