कबीर आश्रम दांदूपुर में हुआ सत्संग और भण्डारे का आयोजन
कबीर आश्रम दांदूपुर में हुआ सत्संग और भण्डारे का आयोजन
कबीर वाणी पर संवाद कार्यक्रम
मुंशीगंज।
गुरुवार को कबीर आश्रम दांदूपुर में सत्संग और भण्डारे का आयोजन हुआ। सत्संग में अमेठी, प्रतापगढ़ ,रायबरेली और सुलतानपुर जनपदों के दो दर्जन से अधिक कबीर पंथी व वैष्णव मत के साधु-सन्त शामिल हुए।
दांदूपुर का यह कबीर आश्रम 200 वर्ष पुराना है। बाबा शत्रुघ्न दास ने इसकी स्थापना की थी। उनकी शिष्या साध्वी कमल दास ने गुरुवार को यहां सत्संग का आयोजन किया। सत्संग में कबीर वाणी पर विस्तार से संवाद हुआ। सन्त प्रकाश दास ने कहा कि संतों की त्रिकुटी और तुलसीदास का विज्ञानमय कोष एक ही है। ‘सद्गुरु आओ हमरे देश, निरखव बाट खड़े’ शबद का उल्लेख किया और कहा कि कबीर को कहीं समझ सकता है, जो उनके मार्ग पर कम से कम आधा रास्ता चले। जीवन-मृत्यु का खेल बिना विराम के चलता है। शरीर की कोई उम्र नहीं,ज्ञान चैतन्य को ही होता है । जो काम क्रोध,लोभ,मोह छोड़ते हुए कुटिल वचन सहने की क्षमता नहीं रखता वह साधु कहने का अधिकारी नहीं। सन्त चेतनदास ने कहा कि सभी तरह के कर्मकाण्ड मानव ने बनाए हैं। कबीर ने हिन्दू और मुसलमान दोनों को कोसा है।
सन्त अमरदास ने कहा कि कबीर का मार्ग कठिन है,परन्तु सबके लिए सुखदायी है। सन्त मान, सम्मान से परे जीवन जीता है। सन्त तभी खुश होता है,जब शिष्य सद्गुरु के मार्ग पर चलें।
सत्संग और भण्डारे में प्रोफेसर रूदल यादव,पूर्व प्रधान रामसुन्दर,बसपा के वि स प्रभारी रामफल फौजी,हरिनाम,शीतला प्रसाद,मस्ताना,गुरुचरन,रामशंकर,शीतला प्रसाद यादव ने साधु-सन्तों की सेवा की।
सन्तराम अंजोर दास,शीतल दास रामदुलारे दास,विश्राम दास,भोलादास,रामकृपाल दास,रामकिशोर दास,गोपाल दास आदि ने भी कबीर के शब्द व भजन सुनाकर लोगों को वाह्याडम्बर से दूर रहकर सच्ची ईश्वर भक्ति और मानवता का संदेश दिया।
कबीर वाणी पर संवाद कार्यक्रम
मुंशीगंज।
गुरुवार को कबीर आश्रम दांदूपुर में सत्संग और भण्डारे का आयोजन हुआ। सत्संग में अमेठी, प्रतापगढ़ ,रायबरेली और सुलतानपुर जनपदों के दो दर्जन से अधिक कबीर पंथी व वैष्णव मत के साधु-सन्त शामिल हुए।
दांदूपुर का यह कबीर आश्रम 200 वर्ष पुराना है। बाबा शत्रुघ्न दास ने इसकी स्थापना की थी। उनकी शिष्या साध्वी कमल दास ने गुरुवार को यहां सत्संग का आयोजन किया। सत्संग में कबीर वाणी पर विस्तार से संवाद हुआ। सन्त प्रकाश दास ने कहा कि संतों की त्रिकुटी और तुलसीदास का विज्ञानमय कोष एक ही है। ‘सद्गुरु आओ हमरे देश, निरखव बाट खड़े’ शबद का उल्लेख किया और कहा कि कबीर को कहीं समझ सकता है, जो उनके मार्ग पर कम से कम आधा रास्ता चले। जीवन-मृत्यु का खेल बिना विराम के चलता है। शरीर की कोई उम्र नहीं,ज्ञान चैतन्य को ही होता है । जो काम क्रोध,लोभ,मोह छोड़ते हुए कुटिल वचन सहने की क्षमता नहीं रखता वह साधु कहने का अधिकारी नहीं। सन्त चेतनदास ने कहा कि सभी तरह के कर्मकाण्ड मानव ने बनाए हैं। कबीर ने हिन्दू और मुसलमान दोनों को कोसा है।
सन्त अमरदास ने कहा कि कबीर का मार्ग कठिन है,परन्तु सबके लिए सुखदायी है। सन्त मान, सम्मान से परे जीवन जीता है। सन्त तभी खुश होता है,जब शिष्य सद्गुरु के मार्ग पर चलें।
सत्संग और भण्डारे में प्रोफेसर रूदल यादव,पूर्व प्रधान रामसुन्दर,बसपा के वि स प्रभारी रामफल फौजी,हरिनाम,शीतला प्रसाद,मस्ताना,गुरुचरन,रामशंकर,शीतला प्रसाद यादव ने साधु-सन्तों की सेवा की।
सन्तराम अंजोर दास,शीतल दास रामदुलारे दास,विश्राम दास,भोलादास,रामकृपाल दास,रामकिशोर दास,गोपाल दास आदि ने भी कबीर के शब्द व भजन सुनाकर लोगों को वाह्याडम्बर से दूर रहकर सच्ची ईश्वर भक्ति और मानवता का संदेश दिया।

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