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मानवता की सेवा सबसे बड़ा धर्म 
भेटुआ ।
मंगलवार को कमासिन में निर्वाण प्राप्त सामजिक चिंतक चुन्नी लाल धम्म सेवक  के जन्म दिन पर धम्म देशना एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धम्म सेवक की सामाजिक सेवाओं और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं पर विस्तार से संवाद हुआ। बौद्ध भिक्षु भन्ते प्रज्ञा मित्र ने धममोपदेश दिए। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान् बुद्ध बाबा साहब डॉ अम्बेडकर और धम्म सेवक के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। सर्व धर्म समभाव की भावना को जीवन्त करते हुए  धम्मसेवक परिवार ने एक दर्जन लोगों को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को  कापी कलम व पेंसिल बांट कर उन्हें अच्छी पढाई करने को प्रेरित किया गया है। पंजाब प्रांत के गुरु द्वारा श्री चन्द्र साहब के सेवादार बाबा मनोहर सिंह ने बच्चों और आयोजकों को आशीर्वाद प्रदान किए। उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। बुद्ध वंदना और त्रिसरण पंचशील कार्यक्रम के बाद विचार गोष्ठी शुरू हुई। भिक्षु प्रज्ञा मित्र ने आर्य अषटांगिक मार्ग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि  तथागत बुद्ध की ओर से मध्यम मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया है। पंचशील का आचरण सबके लिए फलदायी है। विचार गोष्ठी का संचालन बौद्धाचार्य मनोज कुमार ने किया। हौसिला प्रसाद, इन्द्र पाल गौतम,  राम मिलन आदि ने धम्म सेवक के जीवन दर्शन और शिक्षाओं की जानकारी दी। राजीव रंजन, राजेंद्र, बबलू तिवारी, हरिकेश पांडेय, मकसूद अहमद, अनवार अहमद, राम प्यारे यादव,  रज्जन सिंह,  मोहित कश्यप, सोनू  गौतम, सियाराम, राम सिंह आदि उपस्थित रहे।

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